computer software

Updated : Jan 12, 2018 in बेसिक कंप्यूटर

कंप्यूटर सॉफ्टवेयर | computer software | प्रकार | फंक्शन | लैंग्वेज वताएं

कंप्यूटर सॉफ्टवेयर | computer software in Hindi 

सॉफ़्टवेयर क्या है | What is Software

सॉफ्टवेयर या प्रोग्राम सिस्ट्म हार्डवेयर के फिजिकल कंपोनेट के विपरीत कम्प्यूटर को कोई कार्य करने के लायक बनाता है। इसमे कई एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर होते हैं जैसे वर्ड प्रोसेसर, जो यूजर को काम करने लायक बनाता है।

इसमें सिस्टम सॉफ्टवेयर होते हैं जैसे – ऑपरेटिंग सिस्टम, जो हार्डवेयर व अन्य सॉफ्टवेयर के साथ तालमेल से या यूजर स्पेसिफिकेशंस को नियंत्रित करने वाले कस्टम सॉफ्टवेयर के जरिए तथा अन्य सॉफ्टवेयर को ठीक ढंग से चलाने लायक बनाता है। इसका काम अश्रर लिखने, पिक्चर खिचने, गेम्स खेलने, फाइनेस मैनेज करने आदि मे होता है।

सॉफ़्टवेयर के प्रकार | Types of software

कम्प्यूटर सिस्ट्म तीन वर्गो में विभाजित होते हैं – सिस्टम सॉफ्टवेयर, एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर और प्रोग्रामिंग सॉफ्टवेयर।

1। सिस्ट्म सॉफ्टवेयर सिस्टम सॉफ्टवेयर कम्प्यूटर हार्डवेयर और कम्प्यूटर सिस्टम को चलाने में मदद करते हैं। इसमें ऑपरेटिंग सिस्टम, डिवाइस ड्राइवस, सर्वस, विंडो सिस्टम, यूटीलिटीज और बहुत कुछ होता है।

सिस्टम सॉफ्टवेयर सर्वर यूजर, एपलीकेशन सॉफ्टवेयर और कम्प्यूटर के हार्डवेयर एसेसरीज डिवाइस जैसे क्म्युनिकेशंस, प्रिंटर्स, रीडर्स, डिसप्लेज, की-बोर्ड आदि के बीच तालमेल बिठाता है।

2। एपलीकेशन सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर यूजर्स को एक या उससे ज्यादा नॉन-कम्प्यूटर संबंधी काम में सहायता करता है।

इन एपलीकेंशस में ऑफिस ऑटोमेशन, बिजनेस सॉफ्टवेयर, एजुकेशनल सॉफ्टवेयर, मेडिकल सॉफ्टवेयर, डाटाबेस और कम्प्यूटर गेम्स शामिल हैं। बिजनेस हाउस एपलीकेशन सॉफ्टवेयर के सबसे बडे यूजर हैं।

3। प्रोग्रामिंग सॉफ्ट्वयर प्रोग्रामिंग सॉफ्टवेयर साधारणतया ज्यादा सुविधाजनक ढंग से विभिन्न प्रोग्रामिंग भाषाएं इस्तेमाल करते हुए कम्प्यूटर प्रोग्राम्स और सॉफ्टवेयर राइट करने में प्रोग्रामर की सहायता के लिए टूल्स उपलब्ध करवाता है।

इन टूल्स में कंपाइलर्स, लिंकर्स, डेबगर्स और अन्य टूल्स शामिल होते हैं। इंटेग्रेटिड डेवलपमेंट एनवायरमेंट आईडीई इन टूल्स को एक सॉफ्टवेयर बंडल में मिला देती है और एक प्रोग्रामर को कंपाइलिंग, इंटरप्रेटर, डीबगिंग आदि के लिए मल्टीपल कमांडस टाइप करने की जरुरत नहीं पडती, क्योंकि आईडीई में साधारणतय: एडवांस ग्राफिकल यूजर इंटरफेस जीयूआई होता है।

सिस्टम सॉफ्टवेयर – इसमें ऑपरेटिंग सिस्टम और यूटीलिटी प्रोग्राम्स दो प्रकार के सिस्टम सॉफ्टवेयर हैं।

(1) ऑपरेटिंग सिस्ट्म ऑपरेटिंग सिस्टम प्रोग्रामों का वह समूह है जिसमें किसी कम्प्यूटर और हार्डवेयर के बीच को-आर्डिनेट (समन्वय  स्थापित) करने के लिए सभी आवश्यक संदेश व निर्देश शामिल होते हैं।

उदाहरण के तोर पे – ऑपरेटिंग सिस्टम इनपुट डिवाइस जैसे की-बोर्ड, माउस, माइक्रोफोन और पीसी कैमरा से इनपुट प्राप्त करता है और कम्प्यूटर पर इसे डिस्पले करने के लिए आउटपुट से समन्वय  स्थापित करता है। प्रिंटर को निर्देश देता है कि कब और कैसे इंफोर्मेशन को प्रिंट करना है। इसके अलावा डिस्क में स्टोर इंफोर्मेशन और मेमोरी के डाटा और निर्देशों के बीच समन्वय स्थापित करता है।

कम्प्यूटर को कार्य करने के लिए ऑपरेटिंग सिस्टम की जरुरत होती है और उच्च स्तरीय फंक्शन के लिए ग्राफिकल यूजर इंटरफेस उपलब्ध कराता है।

ऑपरेटिंग सिस्टम के मुख्य फंक्शन | The main function of the operating system

 कम्प्यूटर को ‌स्टार्ट करना | Start the computer

कम्प्यूटर को स्टार्ट और रीस्टार्ट करने को बूटिंग कह्ते है। जब आप कम्प्यूटर बिल्कुल बंद करने के बाद ऑन करते हैं, तो आप कोल्ड बूट करते हैं। वार्म बूट वह है, जिसमें पह्ले से ही कम्प्यूटर में पावर ऑन हो और आप रीस्टार्ट करें।

हर बार जब आप कम्प्यूटर बूट करते हैं, तो करनेल और अन्य हिस्से ऑपरेटिंग सिस्टम की इंस्ट्रक्शंस को इस्तेमाल करता है, जो इंस्ट्रक्शंस कम्प्यूटर की मैमोरी रैम में हार्ड डिस्क स्टोरेज से लोड या कॉपी की गई होती है।

करनेल ऑपरेटिंग सिस्टम का केंद्रीय हिस्सा है। जो मेमोरी व डिवाइसिस, एप्लीकेंशस स्टार्ट को मैनेज करता है और डिवाइसिस, प्रोग्राम्स, डाटा और इंफोर्मेशन  जैसे कम्पूटर के रिसोर्सेज को निर्धारित करता है। करनेल मेमोरी का रेजीडेंट है। इसका मतलब  है कि जब कम्प्यूटर चलाता है, तो यह मेमोरी में रह्ता है।

ऑपरेटिंग सिस्टम के अन्य पार्ट नॉन रेजीडेंट हैं। इसका मतलब है कि उनके इंइट्रक्शंस की जब तक जरुरत नहीं होती है, तब तक वह हार्ड डिस्क पर रहते हैं।

ऑपरेटिंग सिस्टम के प्रकार |Types of operating systems

1 सिंगल यूजर सिंगल टास्क ऑपरेटिंग सिस्टम सिंगल यूजर सिंगल टास्क ऑपरेटिंग सिस्टम को एक ही यूजर के बेह्तर कार्य करने के लिए बनाया गया है और इस पर एक बार में सिर्फ एक प्रोग्राम पर ही कार्य हो सकता है।

2 सिंगल यूजर मल्टी टासिकंग ऑपरेटिंग सिस्ट्म – इस ऑपरेटिंग सिस्टम की सहायता से एक यूजर एक बार में कई प्रोग्राम रन कर सकता है।

माइक्रोसॉफ्ट विंडोज और एप्पल का मेकिन्टोश इसी प्रकार के ऑप्रेटिंग सिस्टम हैं जो सामान्य: प्रयोग में आए हैं।

3 मल्टी यूजर मल्टी टासिकंग ऑपरेटिंग सिस्टम – इस प्रकार के ऑपरेटिंग सिस्टम में कई यूजर कम्प्यूटर पर कार्य कर सकते हैं।

इस प्रकार के ऑपरेटिंग सिस्टम नेटवर्क सिस्टम में इस्तेमाल किए जाते हैं।

4 बैच प्रोसेसिंग ऑपरेटिंग सिस्टम – बैच प्रोसेसिंग ऑपरेटिंग सिस्टम में डाटा और प्रोग्रामों को कार्य करने के लिए बंडल के रुप में एग्जीक्यूट करने की जरुरत होती है।

इस प्रकार के ऑपरेटिंग सिस्टम में प्रोसेसिंग स्वत: (ऑटोमेटिकली) की जाती है।

5 रीयल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम – इस प्रकार के ऑपरेटिंग सिस्टम में एक निशिचत टाइम में कार्य करना होता है। इस प्रकार के ऑपरेटिंग सिस्टम तब इस्तेमाल किए जाते हैं जब समय काफी कम होता है और कार्य काफी ज्यादा।तब इस प्रकार के ऑपरेटिंग सिस्टम विशेष रुप से उस समय काफी महत्वपूर्ण होते हैं जब गणनाओं की बहुत ज्यादा अहमियत हो और कार्य में देरी करने से परेशानी हो सकती हो।

ऑपरेटिंग सिस्टम की कैटेगरी (श्रेणी)ऑपरेटिंग सिस्टम की समान्य तीन श्रेणियां होती हैं –स्टैंड अलोन, सर्वर और एंबडेड।

 (A) स्टैंड अलोन ऑपरेटिंग सिस्टम – स्टैंड अलोन ऑपरेटिंग सिस्टम एक कंपलीट ऑपरेटिंग सिस्टम है।

जो डेस्कटॉप कम्पयूटर, नोटबुक और मोबाइल कम्प्यूटिंग डिवाइस पर काम करता है।

(i) एमएस डॉस – एमएस डॉस माइक्रोसॉफ्ट डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम पर कार्य करता है। एमएस डॉस टेक्स्ट की लाइनों को डेस्क्टॉप पर डिसप्ले करता है।

आप कमांड को टाइप कर टास्क को कर सकते हैं। इन दिनो प्राय: डॉस का इस्तेमाल ज्यादा नहीं किया जाता है।

(ii) माइक्रोसॉफ्ट विंडोज – माइक्रोसॉफ्ट ने विंडोज ऑपरेटिंग सिस्ट्म को डेवलप किया है

जिसमें ग्राफिकल यूजर इंटरफेस की सुविधा है।

विंडोज के कुछ लोकप्रिय ऑपरेटिंग सिस्ट्म हैं –

विंडोज 3.1,

 विंडोज एक्सपी, विंडोज विस्टा और विंडोज 7।

(iii) लाइनेक्स – यह यूनिक्स आधारित ऑपरेटिंग सिस्टम है जो वलर्ड वाइड वेव पर नि:शुल्क उपल्ब्ध है। कई कंपनियां जैसे रेड हैट, कोरेल और मैंड्रेक ने इस्तेमाल में आसान लाइनेक्स के कई वर्जन तैयार किए हैं जिन्हें आप खरीद सकते हैं।

लाइनेक्स ओपन सोर्स कोर्ड ऑपरेटिंग सिस्टम है। इसे कॉपी, मोडीफाई और कुछ निर्देशों के साथ पुन: व्यवसि‌थत किया जा सकता है। अपने इसी गुण के कारण यह यूजर्स में काफी लोकप्रिय है।

(B) सर्वर ऑपरेटिंग सिस्टम – सर्वर ऑपरेटिंग सिस्टम वह ऑपरेटिंग सिस्टम है जिसे विशेष रुप से नेटवर्क को सपोर्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है।

सर्वर ऑपरेटिंग सिस्टम विशेष रुप से सर्वर पर कार्य करता है। सभी सर्वर ऑपरेटिंग सिस्टम मे विंडोज सर्वर 2008, यूनिक्स सोलरीज और नेटवेयर शामिल होता है।

(i) विंडोज सर्वर 2008 – यह विंडोज सर्वर 2003 का आधुनिक रुप है।विंडोज सर्वर 2008 में शामिल इंप्रूविंग वेब सर्वर मैंनेजमेंट जैसे फीर्चस यूजर डाटा को शेयर करने, सर्वर की सुविधा को बढाने और विभिन्न सॉफ्टवेयर अटैक से बचाने की सुविधा देते हैं।

(ii) यूनिक्स – यह मल्टीयूजर, मल्टी टासिकंग सर्वर ऑपरेटिंग सिस्टम है, जो कार्यस्थलों और सर्वर पर मास्टर कंट्रोल प्रोग्राम की तरह इस्तेमाल होता है।

पह्ले कम्प्यूटर पर सिर्फ इटंरनेट को चलाने के लिए यूंनिक्स का इस्तेमाल किया जाता था। लेकिन अब इंटरनेट पर सर्वर के लिए काफी बडे पैमाने पर यूनिक्स का इस्तेमाल किया जाता है।

(iv) सोलरीज यह यूनिक्स का वर्जन है जिसे सन माइक्रोसिस्टम दवारा डेवलप किया गया है। यह ऑपरेटिंग सिस्टम है जिसे विशेष रुप से ई-कॉमर्स एप्लीकेंशस के लिए डिजाइन किया गया है।

(v) नॉवेल्स नेटवेयर – यह सर्वर ऑपरेटिंग सिस्टम है जिसे क्लाइंट/सर्वर के लिए डिजाइन किया गया है।

नेटवेयर ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर को सपोर्ट करता है और मुख्य जगह से जुडे सभी पर्सनल कम्प्यूटर पर कार्य करता है।

(C) एंबडेड ऑपरेटिंग सिस्ट्म – एंबडेड ऑपरेटिंग सिस्टम मोबाइल डिवाइस और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक्स पर इस्तेमाल होता है।

यह रोम चिप पर सिथत होता है। इन दिनो लोकप्रिय एंबडेड ऑपरेटिंग सिस्टम में विंडोज एंबडेड सीई, विंडोज एंबडेड सीई, विंडोज मोबाइल पाम ओएस, आईफोन ओएस, ब्लैकबैरी, गूगल, एंड्रॉयड और सिंबियन ओएम शामिल होते है।

(i) विंडोज एंबडेड सीई विंडोज एंबडेड सीई एक विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम है

जिसे क्म्यूनिकेशन, मनोरंजन व कुछ कंम्प्यूटिंग डिवाइस के लिए कुछ विशिष्ट फंक्शन जैसे डिजिटल कैमरा, ऑटोमेटेड मशीन, डिजिटल फोटो फ्रेम, फ्यूल पंप, सिक्योरिटी रोबोटस, पोर्टेबल मीडिया प्लेयर के साथ तैयार किया गया है।

(ii) विंडोज मोबाइल यह विंडोज एंबडेड सीई पर आधारित ऑपरेटिंग सिस्टम होता है।

विंडोज मोबाइल कई फीचर्स प्रोवाइड कराते हैं जो यूजर को ई-मेल चेक करने, इंटरनेट का इस्तेमाल करने, फोटो खींचने, वीडियो तैयार करने, संगीत सुनने और गेम खेलने की सुविधा देते हैं।

(iii) पाम ओएस – पर्सनल डिजिटल असिस्टेंट स्मार्ट फोन के लिए वर्ष 1996 में यह पाम दवारा डिजाइन किया गया मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम है।

पाम ऑपरेटिंग सिस्टम को विशिष्ट प्रकार के डिवाइस के रुप में पाम साइज के डिवाइस में फिट करने के लिए डिजाइन किया गया था।

(iv) ब्लैकबेरी ओएस – यह रिसर्च इन मोशन दवारा सप्लाई किए डिवाइस पर चलने वाला ऑपरेटिंग सिस्टम है।

ब्लैकबेरी डिवाइस फोन की क्षमता के अनुसार पिम शिडयूल तथा संपर्क को व्यवसिथत करने की क्षमता भी मुहैया कराते हैं।

(v) गूगल एंड्रायड – यह गूगल दवारा मोबाइल डिवाइस के लिए डिजाइन किया गया ऑपरेटिंग सिस्टम है।

गूगल एंड्रायड में कई फीचर्स जैसे ई-मेल अकांउट को चेक करना, अलार्म घडी, वीडियो तैयार करना और वेब ब्राउसिंग आदि शामिल हैं।

(vi) सिंबियन ओएस – यह स्मार्टफोन दवारा डिजाइन किया गया और नोकिया दवारा मेंटीनेंस किया जाने वाला ओपन सोर्स मल्टीटास्किंग ऑपरेटिंग सिस्टम है|

लेटेस्ट वर्जन सिंबियन 3, अधिकारिक रुप से वर्ष 2010 में रिलीज किया गया था और नोकिया एन 8 में पह्ली बार इसका इस्तेमाल किया गया।

यूटीलिटी प्रोग्राम्स – ज्यादातर ऑपरेटिंग सिस्टम में अनेक यूटीलिटी प्रोग्राम्स होते हैं। यह एक प्रकार के सिस्टम सॉफ्टवेयर होते हैं जो साधारणतया कम्प्यूटर, उसके डिवाइस या उसके प्रोग्राम्स मैनेज करने संबंधी काम करते हैं।

ये यूटीलिटी भी कह्लाते हैं। आप अलग से यूटीलिटी खरीद सकते हैं, जिनसे ऑपरेटिंग सिस्टम की क्षमता बढती है। McAfee

और Norton

वेब-बेस्ड यूटीलिटी सर्विसेस प्रदान करते हैं।

(i) फाइल कंप्रेशन – फाइल कंप्रेशन यूटीलिटी का प्रयोग फाइल का साइज सिकोडने में होता है। स्टोरेज मीडिया का स्पेस बचता है, क्योंकि ओरिजनल फाइल के मुकाबले कंप्रेस्ड फाइल कम स्टोरेज स्पेस लेती हैं।

इससे सिस्टम की परफोर्मेश बढती है। कंप्रेस्ड फाइल में जिप एक्स्टेंशन होता है, वह जिप्ड फाइल भी कह्लाती है।

(ii) अनइंस्टालर – एक यूटीलिटी अनइंस्टालर कह्लाती है, जो एक एप्लीकेशन और आपके सिस्टम फाइल्स से इस एप्लीकेशन से जुडी फाइल एंट्रीज को रिमूव करती है। जब आप एक एप्लीकेशन इंस्टाल करते हैं, तो ऑपरेटिंग सिस्टम इन्फोर्मेशन को रिकोर्ड करता है जो सिस्टम फाइल में सॉफ्टवेयर को चलाने में प्रयुक्त होती है।

यदि आप अनइंस्टालर चलाए बिना प्रोग्राम से जुडी फाइल्स और फोल्डर्स डिलीट करके अपने कम्प्यूटर से एप्लीकेशन रिमूव करते हैं, तो भी सिस्टम फाइल एंट्रीज आपके कम्प्यूटर में रह्ती हैं।

(iii) डिस्क स्कैनर डिस्क स्कैनर ऐसी यूटीलिटी है, जो डिस्क या फ्लॉपी डिस्क की प्रॉब्लम्स को सर्च, डिटेक्ट और करेक्ट करता है और अनावश्यक फाइल्स ह्टाता है।

विंडोज में दो डिस्क स्कैनर होते हैं। एक प्रोब्लम्स डिटेक्ट करता है और दूसरा उसके लिए सर्च करता है तथा टेंपरेरी फाइल्स जैसे अनावश्यक फाइलों को रिमूव करता है।

(iv) स्क्रीन सेवर – स्क्रीन सेवर ऐसी यूटीलिटी है। यदि किसी समय तक की-बोर्ड और माउस से कोई एकिटविटी नहीं होती है, तो स्क्रीन सेवर मॉनीटर की स्क्रीन पर कोई चलती- फिरती इमेज या स्क्रीन उत्पन्न करता है।

जब आप की-बोर्ड की किसी की को प्रैस करते हैं या माउस को हिलाते हैं, तो स्क्रीन पर पह्ले की डिसप्ले इमेज लौट आती है। अपने कम्प्यूटर को सुरक्षित करने के लिए, आप अपने स्क्रीन सेवर को कंफिगर कर सकते हैं। ताकि कोई यूजर स्क्रीन सेवर रोकने के लिए और पह्ले की इमेज को रीडिसप्ले करने के लिए अवश्य ही पासवर्ड टाइप करें।

(v) डिस्क डीफ्रेगमेंट – ये यूटीलिटी कम्प्यूटर की हार्ड डिस्क पर फाइल्स और अनयूज्ड स्पेस को रिकोगनाइज करती है,

ताकि ऑपरेटिंग सिस्टम ज्यादा तेजी से डाटा एक्सेस कर सके। इसे डिस्क डीफ्रेग्मेंट कह्ते हैं।

2 एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन प्रोग्राम जो यूजर के लिए खास काम को पूरा करते हैं जो एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर कह्लाते हैं।यह एक प्रोडेकिटविटी बिजनेस टूल है। यह ग्राफिक और मल्टीमीडिया की सहायता करता है, घरेलू और पर्सनल बिजनेस की गतिविधियों को स्पोर्ट करता है, और कम्यूनीकेशन टूल्स भी प्रदान करता है। उदाहरण के लिए – सभी ई-मेल प्रोग्राम्स, क्म्यूनिकेशन और प्रोडेकिटविटी प्रोग्राम्स हैं।

(i) प्रोडेकिटविटी सॉफ्टवेयर प्रोडेकिटविटी सॉफ्टवेयर में प्रोसेसिंग, स्प्रेडशीट,

डाटाबेस, प्रेजेंटेशन, ग्राफिक्स, पर्सनल इन्फोर्मेशन मैनजर, सॉफ्टवेयर सूट, एकाउंटिंग और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट जैसे एप्लीकेशंस शामिल हैं।

(ii) वर्ड प्रोसेसिंग सॉफ्टवेयर – वर्ड प्रोसेसिंग, वर्ड प्रोसेसर का प्रयोग करते हुए डाक्यूमेंट क्रिएट करने की क्षमता है। माइक्रोसॉफ्ट वर्ड सर्वाधिक व्यापक प्रयुक्त कम्प्यूटर वर्ड प्रोसेसिंग सिस्टम है।

वर्ड प्रोसेसिंग ऑटोमैटिक जेनरेशन जैसे टेक्स्ट मेनीपुलेशन फंक्शंस दिखाता है। – की-वर्डस  की इंडिक्स और उनके पेज नंबर्स, सेक्शन टाइल्स के साथ कंटेटं की टेबल्स और उनके पेज नंबर्स, सेक्शन के साथ क्रॉस-रेफ्रेंसिंग या नंबर्स, फुटनोट नंबरिंग, केप्शन टाइटल्स के साथ फिगर्स की टेबल्स और उनके पेज नंबर्स। अन्य वर्ड प्रोसेसिंग फंक्शंस में स्पेल चैकिंग, ग्रामर चैकिंग और थिसारस पर्यावाची शब्दकोश शामिल हैं। थिसारस समान और विपरीत अर्थों वाले शब्द ढूंढता है।

(iii) स्प्रेडशीट सॉफ्टवेयर – स्प्रेडशीट सॉफ्टवेयर दूसरा व्यापक प्रयुक्त सॉफ्टवेयर है, जो आपको रो और कॉलम में डाटा आर्गेनाइज करने की अनुमति देता है।

इलैक्ट्रॉनिक वर्कशीट में डाटा उसी तरह आर्गेनाइज किया जाता है, जैसे ये मैन्युअल वर्कशीट पर किया जाता है। वर्ड प्रोसेसिंग सॉफ्टवेयर के साथ ज्यादातर स्प्रेडशीट सॉफ्टवेयर में आपको वर्कशीट बनाने, एडिट और फॉर्मेट करने वाले बेसिक फीचर्स होते हैं।

(iv) डाटाबेस सॉफ्टवेयर – डाटाबेस इस तरह आर्गेनाइज्ड डाटा का कलेक्शन होता है कि वह डाटा को एक्सेस, रीट्रीवल, सुधारने और प्रयोग करने की अनुमति देता है।

पर्सनल कम्प्यूटर के ज्यादातर लोकप्रिय डाटाबेस सॉफ्टवेयर पैकेजज रो और कॉलम्स में आर्गेनाइज्ड होते हैं। डाटाबेस टेबल के समूह में बने होते हैं। एक टेबल की एक रो रिकार्ड होती है, जिसमें पर्सन, प्रोडक्ट या इवेंट के बारे में जानकारी होती है। एक टेबल में एक कॉलम फील्ड होता है, जिसमें रिकॉर्ड के अंदर की जानकारी होती है।

(v) प्रेजेंटेशन ग्राफिक्स सॉफ्टवेयर – प्रेजेंटेशन ग्राफिक्स आपको ऐसे डाक्यूमेंट क्रिएट करने की अनुमति देते है, जो आइडियाज, मैसेजेज और अन्य इन्फोर्मेशन किसी ग्रुप को कम्युनिकेट करने में प्रयुक्त होते हैं। जब आप प्रेजेंटेशन बनाते हैं, तो आप स्लाइड टाइमिंग भी सेट कर सकते हैं, ताकि प्रेजेंटेशन बिना किसी देरी के अगली स्लाइड को स्वत: ही प्रदर्शित करे।

उदाहरण के लिए – एक स्लाइड धीरे – धीरे डिसाल्व हो और अगली स्लाइड देखने में आती जाए। एक बार आपने प्रेजेंटेशन क्रिएट कर ली, तो उसे आप स्लाइड या विभिन्न अन्य फॉर्मेटस में देख और प्रिंट कर सकते हैं। प्रेजेंटेशन ग्राफिक्स में स्पेलिंग चैकर, फोंट फॉर्मेटिंग केपेबिलिटीज, मौजुदा स्लाइड शो को वलर्ड वाइव वैब के लिए स्टैंडर्ड डक्यूमेंट फॉरमेट में बदलने की क्षमता जैसे – वर्ड प्रोसेसिंग सॉफ्टवेयर में पाए जाने वाले कुछ फीचर्स भी जुडे होते हैं।

(vi) एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर – कंपनियां एकाउंटिग सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करने से अपनी फाइनेंशियल ट्रांजेक्शंस रिकार्ड या रिपोर्ट कर सकती हैं।

इन सॉफ्टवेयर से छोटे और बडे बिजनेस यूजर्स जनरल लेजर, एकाउंट रिसीवेबल, एकाउंट पेयेबल, परचेजिंग, इंवॉइसिंग, जॉब कॉसिटंग और पेरोल फंक्शंस संबधी एकाउंटिग एकिटविटीज कर सकते हैं।

(vii) केड कम्प्यूटर एडिड डिजाइन (CAD) का प्रयोग प्रोडक्टस को डिजाइन,

डेवलप और ऑपिटमाइज करने के लिए होता है।

(viii) पेंट/इमेज एडीटिंग सॉफ्ट्वेयर – इमेज एडीटिंग सॉफ्टवेयर पेंट सॉफ्टवेयर की सारी खूबियां देता है।

यूजर पेन, ब्रश, आईड्रॉपर और पेंट बकेट जैसे विभिन्न ऑन-स्क्रीन टूल्स से पिक्चर्स, शेप्स और अन्य ग्राफिकल इमेज ड्रा कर सकते हैं।

(ix) वीडियो व ऑडियो एडीटिंग सॉफ्टवेयर वीडियो एडीटिंग सॉफ्टवेयर से आप किलप कह्लाने वाली वीडियो के एक हिस्से को मोडिफाई कर सकते हैं।

उदाहरण के लिए, आप वीडियो किलप की लंबाई घटा सकते हैं। किलप्स को रीऑर्डर कर सकते हैं। ऑडियो एडीटिंग सॉफ्टवेयर में फिल्टर होते हैं, जो ऑडियो क्वालिटी बढाने के लिए बने होते हैं। ऑडियो किलप से डिस्ट्रेकिटंग और बैकग्राउंड के शोर को फिल्टर ह्टा सकता है।

(x) ई-मेल – ई-मेल पर्सनल और बिजनेस यूजर दोनों के दवारा इस्तेमाल की जाने वाली मुख्य क्म्युनिकेशन टेक्नोलॉजी है। ई-मेल लोकल एरिया नेटवर्क या वाइड एरिया नेटवर्क जैसे कम्प्यूटर नेटवर्क  के जरिए मैसेज का ट्रांसमिशन है। आप ई-मेल सॉफ्टवेयर को ई-मेल मैसेज क्रिएट, सेंड, रिसीव, फॉरवर्ड, स्टोर, प्रिंट और डिलीट करने के लिए इस्तेमाल करते हैं।

(xi) वेब ब्राउसर्स -वेब ब्राउसर, इंटरनेट पर वेब पेज को एक्सेस और देखने के लिए इंटरफेस की तरह काम करता है

ब्राउसर्स में वेब साइट के जरिए आपको नेवीगेट करने में मदद देने के लिए बटन सहित कई विशेष फीचर्स होते हैं।

3। प्रोग्रामिंग सॉफ्टवेयर – प्रोग्रामिंग लैंग्वेज वर्डस, सिंबल और कोडस का समूह होता है, जिनका कम्प्यूटर दवारा प्रोसेस और एक्सेस कर सकने लायक इंस्ट्रक्शंस क्रिएट करने में इस्तेमाल होता है।

प्रोग्रामर कम्प्यूटर प्रोग्राम तैयार करने के लिए जो स्टेप्स लेता है, उसे प्रोग्राम डेवलपमेंट लाइफ साइकिल (PDLC) कह्ते हैं।

(i) प्रोग्रामिंग लैंग्वेज –जिस तरह आदमी इंग्लिश, हिंदी, पंजाबी, फ्रेंच आदि बोली जाने वाली विभिन्न भाषाओं को समझता है, उसी तरह कम्प्यूटर विभिन्न प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को समझता है।

कम्प्यूटर प्रोग्रामर इनफोर्मेशन सिस्टम की जरुरतों का सॉल्यूशन क्रिएट करने के लिए विभिन्न प्रोग्रामिंग लैंग्वेज या प्रोग्रम डेवलपमेंट टूल्स में से किसी एक को चुन सकता है।

(ii) प्रोग्राम डेवलपमेंट टूल्स – ये प्रोग्राम डेवलपमेंट टूल्स कम्प्यूटर में कम्युनिकेट करने के लिए जरुरी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज इंस्ट्रक्शंस स्वत: ही क्रिएट करते हैं।

प्रोग्राम डेवलपमेंट टूल्स के साथ, एक डेवल्पर को प्रोग्रामिंग लैंग्वेज सीखने की विशेष रुप से जरुरत नहीं है।

(iii) प्रोग्राम डेवलपमेंट लाइफ साइकल (PDLC) – कोडिंग करते हुए विशेष प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में प्रोग्राम लॉजिक लिखना, मशीन लैंग्वेज में बदलने के लिए प्रोग्राम को असेंबली और कंपाइल करना, प्रोग्राम को टैसिटंग व डीबगिंग करना।

प्रोग्राम डेवलपमेंट लाइफ साइकिल, इन्फोर्मेशन सिस्टम के डेवलपमेंट के जरिए इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी (आई।टी।) के प्रोफेशनल्स को गाइड करता है। इसलिए प्रोग्राम डेवलपमेंट  लाइफ साइकिल, प्रोग्राम डेवलपमेंट के जरिए कम्प्यूटर प्रोग्रामर्स को गाइड करता है।

प्रोग्रामिंग लैंग्वेजेस की केटेगरी – इसकी पांच मुख्य लैंग्वेज हैं।

(A) मशीन लैंग्वेज – फसर्ट- जेनरेशन लैंग्वेज के नाम से मशहूर मशीन लैंग्वेज अकेली लैंग्वेज है, जिसे कम्प्यूटर सीधा समझता है।

मशीन लैंग्वेज प्रोग्राम्स केवल उन कम्प्यूटरों पर चलते हैं, जिनके लिए वे बनाए गए हैं। इसलिए वे मशीन-डिपेंडेंट हैं। मशीन लैंग्वेज प्रोग्राम्स अन्य कम्प्यूटरों के लिए पोर्टेबल नहीं हैं। मशीन लैंग्वेज की 1st और 0s में प्रोग्राम्स की कोडिंग उबाऊ और ज्यादा समय खपाने वाली हो सकती है।

(B) असेंबली लैंग्वेज – असेंबली लैंग्वेज भी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज की सेकेंड जेनरेशन है, असेंबली लैंग्वेज में इंस्ट्रक्शंस, एब्रीविएशंस और कोडस का इस्तेमाल करते हुए लिखे जाते हैं। असेंबली लैंग्वेज में प्रोग्रामर सिंबोलिक एड्रेस की स्टोरेज लोकेशन बताता है।

उदाहरण के लिए एक प्रोग्रामर यूनिट प्राइस का एक्चुअल न्यूमेरिक स्टोरेज एड्रेस का प्रयोग करने के बजाय वह सिंबोलिक नेम PRICE का इस्तेमाल कर सकता है। असेंबली लैंग्वेज प्रोग्राम की एक दिक्कत यह है कि इसे कम्प्यूटर को समझाने के लिए मशीन लैंग्वेज में ट्रांसलेट करना पडता है।

(C) हाई-लेवल लैंग्वेजेस – हाई-लेवल लैंग्वेजेस 1950 और 1960 के दश्क में विकसित की गई। मशीन व असेंबली लैंग्वेज जैसे लो-लेवल लैंग्वेज के विपरीत, हाई-लेवल लैंग्वेजेस प्रोग्रामर के लिए प्रोग्राम्स डेवलप व मेंटेन करना आसान बनाती है।

प्रोग्रामर्स के लिए पढना और इस्तेमाल करना भी आसान हो गया है। क्योंकि हाई-लेवल लैंग्वेजेस मशीन-इनडिपेंडेंट हैं।

(D) थर्ड-जेनरेशन लैंग्वेज (3GL) – थर्ड-जनरेशन लैंग्वेजस इंस्ट्रक्शन अंग्रेजी के शब्दों की तरह सीरीज में लिखे जाते हैं। उदाहरण के लिए – प्रोग्रामर एडीशन के लिए ADD और प्रिंट के लिए PRINT लिखता है।

जिस तरह असेंबली लैंग्वेज प्रोग्राम में 3GL कोडस को सोर्स प्रोग्राम कहा जाता है। जो कम्प्यूटर को समझने लायक बनाने के लिए मशीन लैंग्वेज में ट्रांसलेट किए जाते हैं। कंपाइलर और इंटरप्रेटर थर्ड- जनरेशन लैंग्वेज को ट्रांसलेट करने के लिए इस्तेमाल होने वाले प्रोग्राम्स हैं।

(i) कंपाइलर – कंपाइलर एक बार पूरे सोर्स प्रोग्राम को लैंग्वेज में कन्वर्ट करता है। यदि कंपाइलर को कोई एरर मिलती है,

तो वह उन्हें प्रोग्राम लिसिंटग फाइल में रिकॉर्ड करता है, जिन्हें कोई प्रोग्रामर पूरी कंपाएलेशन का काम समाप्त होने के बाद प्रिंट कर सकता है।

(ii) इंटरप्रेटर – जब कंपाइलर एक बार पूरा प्रोग्राम ट्रांसलेट कर लेता है, तो इंटरप्रेटर प्रोग्राम कोड स्टेटमेंट को ट्रांसलेट करता है।

इंटरप्रेटर कोड स्टेटमेंट को पढता है, वह इसे एक या ज्यादा मशीन लैंग्वेज इंस्ट्रक्शंस में बदलता है और वह प्रोग्राम में अगले कोड स्टेटमेंट से पह्ले मशीन लैंग्वेज इंस्ट्रक्शंस को एग्जीक्यूट करता है। आप हर बार सोर्स प्रोग्राम चलाते हैं, सोर्स प्रोग्राम मशीन लैंग्वेज में इंटरप्रेट होते हैं, स्टेटमेंट के बाद स्टेटमेंट और तब एग्जीक्यूट होते हैं।

(E) फोर्थ-जनरेशन लैंग्वेजेस 3GL की तरह फोर्थ-जनरेशन लैंग्वेजेस (4GL) अंग्रेजी तरह की स्टेटमेंट का प्रयोग करती है। 4GL नॉन प्रोसीजरल लैंग्वेज है। 4GL में प्रोग्राम कोड करने में कम समय और प्रोग्रामर के कम प्रयासों की जरुरत होती है।

वास्तव में 4GL इस्तेमाल में इतने आसान हैं कि बहुत कम प्रोग्रामिंग की समझ रखने वाले यूजर्स, फोर्थ-जनरेशन लैंग्वेजेस का इस्तेमाल करके प्रोग्राम डेवलप कर सकते हैं। ये शकितशाली लैंग्वेजेस, डाटाबेस एड्मिनिस्ट्रेटर्स को डाटाबेस व उसके स्ट्रक्चर को डिफाइन करने, प्रोग्रामर्स को डाटाबेस में डाटा मेंटेन करने और यूजर्स को डाटाबेस से सबाल करने की अनुमति देती हैं।

(F) फिफ्थ जेनरेशन लैंग्वेज – फिफ्थ जेनरेशन कम्प्यूटर क्रत्रिम समझ के रुप में इस्तेमाल किए गए हैं।

फिफ्थ जेनरेशन के कम्प्यूटर को तैयार करने का उद्देश्य एसी डिवाइस तैयार करना है जो आम भाषा के साथ काम करे और यह इसे सीखने में और ऑर्गनाइज्ड करने में सक्षम हो। रोबोट इसका एक अच्छा उदाहरण है।

आशा करता हूं आपको इस आर्टीकल से जुडी सारी जानकारी मिल गई होगी। अगर आपको ये आर्टीकल अच्छा लगे तो कोमेंट और लाइक जरुर करें।    

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