Updated : Oct 19, 2018 in मोबाइल ऐप

अब भारत में लॉंच होगा लाई-फाई (Li-Fi) कैसे काम करता है आइए जानें|

लाई-फाई (Li-Fi) / ये कैसे काम करता है/ लाई-फाई (Li-Fi) भारत में होगा जल्द लॉंच/ इसके फायदे और नुकसान आइए जानें।

आपने 4G तकनीक का इस्तेमाल किया है, 5G तकनीक भी जल्द लॉंच होने वाली है। लेकिन ह्म आपको ऐसी टेक्नोलोजी के वारे में वता रहें हैं जिसके चलते आप4G और5G की तकनीक को भुल जाएगें। उसका नाम है लाई-फाई।

लाई-फाई (Li-Fi) क्या है?

li-fi

  • लाई-फाई ( Li-Fi ) का पूरा अर्थ है लाइट फिडेलिटी (light fidelity)।
  • इसका अविष्‍कार एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के एक प्रोफ़ेसर/इंजीनियर हेराल्ड हास (Harald Haas ) ने सन् 2011 में किया था।


लाई-फाई (Li-Fi) कैसे काम करता है

लाई-फाई एक ऐसी वायरलेस ब्रॉडबैंड टेक्नोलॉजी है जो डेटा भेजने के लिए LED का इस्तेमाल करती है और जो सौ गुना तेज स्पीड से काम करती है। इस तकनीक में डेटा विजिबल लाइट कम्युनिकेशन द्वारा ट्रांसफर होता है। नेटवर्क्स के बीच डेटा LED Lights के दवारा भेजा जाता है।

li-fi signal

इसके लिए एक विद्युत के स्रोत, जैसे कि एक स्टैंडर्ड एलईडी बल्ब, एक इंटरनेट कनेक्शन और एक फोटो डिटेक्टर की जरूरत होती है। इस परीक्षण में लाई-फाई युक्त विद्युत बल्ब से 1 Gbps स्पीड से डेटा को ट्रांसफर किया जाता है।  आमतोर पर ये स्पीड 224 Gbps तक हो सकती है, जो कि वाई-फाई स्पीड से कई गुणा ज्यादा है। जिससे आप एक सेकंड में 1.5 GB की स्पीड से 18 फिल्मों को डाउनलोड कर सकते हैं।

भारत में लाई-फाई (Li-fi) जल्द होगा लॉंच

लाई-फाई टेक्नोलोजी का प्रयोग अन्य देश कर रहे हैं। इस नई टेक्नोलोजी से वहां के लोगों में कॉफी उत्साह है, जिसके चलते इंटरनेट की स्पीड Wi-Fi से 100 गुणा फास्ट हो गई है।

LED bulb

अव ये सुविधा भारत में जल्द लॉंच होने वाली है। आपको ये इंटरनेट की सुविधा एलईडी बल्ब से मिलेन वाली है। हाल ही में एक प्रोजेक्ट के तहत इन्फर्मेशन ऐंड टेक्नॉलजी मिनिस्ट्री ने एक नई तकनीक का सफल टेस्ट किया है। इस नई तकनीक को लाई-फाई का नाम दिया गया है।

भारत में हो रही है रिसर्च

देश के ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट की सुविधा को पहुंचाना अब वहुत आसान होगा। Indian Institute of Technology Madras

Institute

इस नई टेक्नोलोजी पर काम कर रही है। देश की जरुरतों के हिसाव से इस टेक्नोलोजी को विकसित करने में IIT मद्रास और ब्ल्व वनाने वाली कंपनी फिलिप्स मिलकर काम कर रहें हैं। इंडियन इंसिटटयूट ऑफ सांइस भी इस प्रोजेक्ट को आगे वढाने में अहम भुमिका निभा रहा है। इस प्रोजेक्ट से जुडी सिनियर अधिकारी नीना पहुजा का कहना है इस नई टेक्नोलोजी से इंटरनेट का विस्तार तेजी से होने वाला है। इस नई टेक्नोलोजी से देश में इंटरनेट की स्पीड Wi-Fi से 100 गुणा फास्ट होगी। जिससे अब लोगों को स्लो नेटवर्क की समस्या से निजात मिलने वाली है। इस नई टेक्नोलोजी का भारत में लॉंच होना भारत देश के लिए वहुत गर्व की वात होगी। भारत में जब से नरेंद्र मोदी जी ने डिजिटल सुविधा को वढावा दिया है तव से देश के लोगों को हर प्रकार की सुविधा उपल्वध हो रही है।

लाई-फाई (Li-Fi) के फायदे

  • इससे आप हाइ-स्पीड से डाटा को ट्रांसफर कर सकते हैं। यह तकनिक WiFi से 100 गुना ज्यादा तेज है।
  • लाई-फाई अन्य सभी नेटवर्क से ज्यादा सुरक्षित नेटवर्क है।
  • लाई-फाई को वहुत सारे डिवाइस के साथ कनेक्ट किया जा सकता है, उसके वावजुद इसकी स्पीड कम नहीं होती।
  • लाई-फाई टेक्नोलोजी स्मार्ट सिटीज लाने में होगी मददगार।
  • इस टेक्नोलोजी से आपको उचित सिंगनल और फुल नेटवर्क की ताकत मिलेगी।
  • LiFi तकनीकी हैकिंग जैसी मुसीबतों को रोकने में काफी मददगार साबित हो सकती है।
  • इसका उपयोग उन स्थानों पर भी किया जा सकता है जहां पे रेडियो तरंगे नहीं पहुचती|
  • लाई-फाई को विद्युत चुम्बकीय संवेदनशील क्षेत्रों जैसे कि विमान के केबिन, अस्पतालों और परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में विद्युत चुम्बकीय हस्तक्षेप के बिना उपयोगी होने का फायदा है।

 लाई-फाई (Li-Fi) के नुकसान

  • लाई-फाई का उपयोग प्रकाश स्रोत के लिए इंटरनेट को चलाने के विना नहीं किया जा सकता इससे उन स्थानों और स्थितियों को सीमित किया जा सकता है जिनमें लाई-फाई का उपयोग किया जा सके।
  • यह दृश्य प्रकाश का उपयोग करता है, सिग्नल की सीमा भौतिक अवरोधों पर सीमित है।
  • प्रकाश के अन्य स्रोत संकेत के साथ हस्तक्षेप कर सकते हैं। सबसे बड़ी संभावित कमियों में से एक यह है कि संकेतों के बाहर की रोकथाम है। सूरज की रोशनी संकेतों में हस्तक्षेप करेगा, जिसके परिणामस्वरूप इंटरनेट को चलाने में वाधा आएगी।
  • लाई-फाई के लिए एक पूरी नई संरचना का निर्माण करने की आवश्यकता होगी।

लाई-फाई (Li-Fi) और वाई-फाई (Wi-Fi) में अंत

किसी भी चीज की वात की जाए तो उसमें कुछ गुण होते हैं, कुछ खामियां होती हैं, कुछ अंतर होते हैं तो कुछ समानताएं। हम वात लाई-फाई और वाई-फाई की कर रहे हैं तो आइए जानते हैं इन दोनों में के वारे में – लाई-फाई Vs वाई-फाई।

लाई-फाई (Li-Fi)

  • पूर्ण रूप से लाइट फिडेलिटी पर अधारित है।
  • लाई-फाई एलईडी बल्ब की मदद से प्रकाश का उपयोग करते हुए डेटा को प्रेषित करता है।
  • लाई-फाई में डाटा ट्रांसफर स्पीड लगभग 1 जीबीपीएस तक मिलती है, जो कि वाई-फाई स्पीड से कई गुणा ज्यादा है।
  • लाई-फाई उच्च घने वातावरण में काम करता है।
  • लाई-फाई की कवरेज दूरी लगभग 10 मीटर है।
  • लाई-फाई नमकीन समुद्र के पानी से गुजर सकता है, घनी क्षेत्र में काम करता है।
  • इसका इस्तेमाल एयरलाइंस, अंडरसा एक्सप्लोरेशन, डेटा स्थानांतरण और इंटरनेट ब्राउज़िंग के लिए अस्पतालों, कार्यालय और घर के परिसर में ऑपरेशन थिएटर में किया जाता है।

वाई – फाई (Wi-Fi)

  • वाई-फाई वायरलेस फिडेलिटी पर अधारित है।
  • वाईफाई वाईफाई राउटर की मदद से रेडियो तरंगों का उपयोग करते हुए डेटा को प्रसारित करता है।
  • वाईफाई में डाटा ट्रांसफर की स्पीड  WLAN-11n 150 एमबीपीएस की है, वाईजीआईजी / जीगा-आईआर के जरिए इसकी स्पीड लगभग 1-2 जीबीपीएस तक होती है।
  • वाई-फाई कम घने वातावरण में काम करता है।
  • वाई-फाई की कवरेज दूरी 32 मीटर(डब्ल्यूएलएएन 802.11 बी / 11 जी), और ट्रांसमिट पावर और ऐन्टेना प्रकार के आधार पर कवरेज दूरी भिन्न होती है।
  • वाई-फाई का इस्तेमाल समुद्री जल के माध्यम से नहीं जा सकता, ये कम घनी क्षेत्र में काम करता है।
  • वाईफाई कियोस्क या वाईफाई हॉटस्पॉट की सहायता से इंटरनेट ब्राउज़िंग के लिए उपयोग होता है।

भारत में वढ रही है इंटरनेट की उपयोगिता

भारत में बढ़ती आबादी (1.252 बिलियन) और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या (402 मिलियन) के साथ साथ, हम निश्चित रूप से अंतरिक्ष से बाहर चल रहे हैं। 2019 तक, अनुमान लगाया जा रहा है कि दुनिया हर महीने लगभग 35 क्विंटलियन बाइट्स जानकारी को आदान-प्रदान करेगा।

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इस स्थिति को देखते हुए, लाई-फाई भारत के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। लाई-फाई अपने नवजात चरण में है, लेकिन इसके लिए गुंजाइशें असीम है। लाई-फाई का भारत में आना मतलव इंटरनेट की दुनिया में एक नई क्रांति होगी। जिसके चलते भारत में इंटरनेट का उपयोग अधिक होगा और लोगों को हाई स्पीड के जरिए अब स्लो नेटवर्क की समस्या से झुझना नहीं पडेगा।

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